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गलती करना मानव का स्वभाव है

  मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है और गलतियां करना उसका स्वभाव है।जीवन के हर मोड़ पर जाने अनजाने गलतियां होती ही रहती है और गलती का होना एक सामान्य घटना है।लेकिन अपने द्वारा हुई गलतियों के बाद अलग-अलग व्यक्ति का अलग नजरिया होता है एक व्यक्ति अपनी गलती को सबक के रूप में लेता है और भविष्य में वैसी गलती दुबारा न हो ऐसा प्रयास करता है जबकि दूसरा अपने द्वारा की गई गलती को अपने ऊपर हावी कर लेता है और उसको लेकर एक अफ़सोस जाहिर करता है की काश!मैंने ऐसा नहीं किया होता तो मेरे साथ ऐसा नहीं होता।दिन रात बस ऐसे...

चिन्ता कितनी सार्थक

  कल हमने चिन्ता ओर तनाव से होने वाली स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं की चर्चा के साथ इसके प्रकारों पर चर्चा की।आज हम चर्चा करते हैं कि चिन्ता अधिकांश भविष्य को लेकर होती है।वर्तमान क्षण की कभी किसी को चिन्ता नहीं होती,चाहे यह क्षण कितनी भी परेशानी भरा होगा।व्यक्ति हमेशा अगले क्षण की ही चिन्ता करता रहता है क्योंकि अगला क्षण हमेशा अनिश्चित होता है और उसको लेकर एक अनजान भय से हम भयभीत रहते हैं और यह भय ही हमारी सभी चिन्ताओं का कारण होता है।मजे की बात तो यह है की यह भय भी हमारी कल्पना की उपज ही होता है...

चिन्ता छोड़ो, सुख से जीयो

 चिन्ता और तनाव ये दोनों शब्द दिखने में तो सामान्य शब्दों जैसे ही नजर आते हैं लेकिन ये मानव के सबसे बड़े शत्रु है।जितना नुकसान एक शत्रु नहीं पहुंचा सकता उससे कई गुना नुकसान ये पहुंचा देते हैं।आज जितनी बीमारियाँ देखने को मिल रही है उनका सबसे बड़ा कारण तनाव है शेष अन्य कारण इतने अधिक प्रभावशाली नहीं है।उच्च रक्तचाप,रक्तशर्करा,ह्रदय सम्बंधित रोग,हार्मोन्स सम्बंधित रोग जो आज बहुतायत में देखने को मिलते हैं इनमें चिन्ता और तनाव बहुत बड़ा कारण होता है।लेकिन इस कारण को हमेशा नजर अंदाज कर दिया जाता है।चिकित्सक किसी रोगी से कहते भी है...

दान का महत्व

  मनुष्य इस सृष्टि का सबसे विवेकशील और विकसित प्राणी है।कुदरत ने जो सोचने समझने की शक्ति इस मनुष्य नाम के प्राणी को दी है उतनी अन्य किसी प्राणी को नहीं दी।इसलिए मनुष्य ने ही सृष्टि के सफल सञ्चालन के लिए समय की जरुरत के हिसाब से नियम बनाये।इन्ही नियमों की श्रृंखला में उसने जब देखा कि इस सृष्टि में कुछ प्राणी तो बलिष्ठ हैं वहीँ कुछ बेहद कमजोर भी हैं,कुछ अपने जीवनकाल में बिमारियों कि गिरफ्त में भी आते हैं यहाँ तक मनुष्यों भी हर मनुष्य की क्षमता अलग-अलग पाई जाती है कुछ काफी मेहनती और कुछ मेहनत नहीं...

कंजूसी और मितव्ययिता

 कंजूसी और मितव्ययिता ये दो शब्द हर किसी को confuse करते हैं।कई बार तो इन्हें एक ही नजरिये से देख लिया जाता है।जबकि ये दोनों शब्द एक दूसरे से विपरीत है जहाँ कंजूसी एक व्यक्ति का दुर्गुण होती है वहीँ मितव्ययिता सदगुण।एक व्यक्ति मितव्ययी हो सकता है लेकिन कंजूस नहीं इसी प्रकार एक कंजूस भी मितव्ययी हो यह जरुरी नहीं होता।व्यवहार में देखने पर दोनों बचत करने वाले नजर आते है। तो फिर क्या अंतर होता है इनमे।इन दोनों के बीच का अंतर समझने के लिए एक उदाहरण लेते हैं।एक व्यक्ति जिसकी उम्र 45-50 वर्ष की हो गई और किसी...

यह आदमी आपकी जिन्दगी बदल सकता है

 हर इंसान दूसरे की कामयाबी को देखकर खुद भी कामयाब होने के सपने देखता है।और कामयाबी की चाहत दिल में होना मानव का सबसे बड़ा सदगुण है।अब प्रश्न यह उठता है की इस कामयाबी के लिए किया क्या जाये,किससे पूछा जाये,किस देवी देवता की पूजा की जाये,क्या अम्बानी बंधुओं की जैसे श्री नाथ जी को अपना इष्ट बनाया जाये?ऐसे अनगिनत प्रश्न मन में उठते रहते हैं की आखिर किससे पूछा जाये कामयाबी का रास्ता इस प्रश्न का सबसे सुन्दर रास्ता बताया है motivational speaker or images bazar के चीफ संदीप माहेश्वरी ने उनके अनुसार एक ही इंसान है जो आपकी...

कुंडली मिलान

अजी साहब लडका सुन्दर सुशील,और पढ़ा लिखा है अपने पैरों पर खड़ा है आय भी काफी अच्छी है,परिवार भी खानदानी है सभी लोग मिलनसार है लेकिन दिक्कत यह आ गई कि अपनी लड़की मांगलिक है उसे मांगलिक लड़का ही चाहिए इसलिए टालना पड़ा।क्या करें बच्ची की जिंदगी का सवाल है।ऐसे शब्द आज के वैज्ञानिक युग में उन लोगों के मुख से सुनने को मिलते है जो अपने आपको ज्ञानी समझते है।और ये वे ही ज्ञानी लोग होते हैं जिनकी धार्मिक आस्था भी दृढ होती है।ये लोग धर्मशास्त्रों को प्रमाण मानते है,पुनर्जन्म की अवधारणा में विश्वास करते हैं।और यह कहते हुए घूमते...