माहवारी क्या है? माहवारी 10-12 उम्र से शुरू होकर 45-50 साल तक स्त्रियों के शरीर में होने वाली स्वाभाविक बायोलॉजिकल प्रक्रिया है! इस प्रकिया में मानव शिशु बनने के लिए अनिवार्य अंडा बनता है और उस अंडे के निषेचित होने के बाद उसके पोषण के लिए आधार (परत) तैयार होता है! लेकिन जब अंडा उस माह निषेचित नहीं होता तो अंडे समेत ये परत शरीर से बाहर स्रावित कर दी जाती है जिससे कि यही प्रक्रिया अगले महीने फिर दोहरायी जा सके! इसी स्राव (जो 4 से 5 दिन तक होता है) को मासिक स्राव कहते हैं! बस इतनी सी बात है! यह एकदम प्राकृतिक प्रक्रिया है जो अगर न घटित हो तो हम आपमें से कोई नहीं होता! माहवारी कोई बीमारी नहीं, बल्कि स्त्री देह के स्वस्थ होने का प्रतीक है. ये स्राव न तो ‘अशुद्ध’ होता है और न ही अनहाइजीनिक! इससे जुड़ी भ्रांतियां और अंधविश्वास: हमारे समाज में माहवारी को जैसे महामारी ही बना दिया गया है: पूजा मत करो वरना भगवान गंदे हो जायेंगे, गाय को मत छुओ वरना वो बछड़ा पैदा नहीं कर सकेगी, पौधों को मत छुओ वरना उनमें फल नहीं आयेंगे, अचार मत छुओ वरना ख़राब हो जायेगा, किसी देव स्थान या पवित्र जगह पे मत जाओ वर...
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मीडिया डाक्टर : पौरूषता बढ़ाने वाले सप्लीमेंटस से सावधान !!-----मैं नहीं, अमेरिकी एफडीआई यह कह रही है....
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चोखा धंधा
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लंबे इंतज़ार के बाद मेरे इस ब्लॉग पर आप सभी का स्वागत।आइये आज आपको कुछ लोगों से मिलाते है-आप है मुम्बई के चरणी रोड पर धंधा करने वाले किशन।आपका नाला सोपारा में स्वयं का फ्लैट है।आमदनी पैंतालीस हजार रुपये महीना।ये हैं पटेल के भारत परेल में इनके दो अप्पार्टमेंट है जिनकी कीमत करीब दो करोड़ रूपया है।एक जूस और स्टेशनरी की दुकान है।ये है पटना की सर्वतीया देवी,साल में करीब छत्तीस हजार रुपये बीमा की क़िस्त चुकाती है।अब इन सभी महानुभावों का पेशा भी बता दें।हुजूर ये सब भिखारी हैं।चोराहे पर खड़े होकर भीख मांगते हैं।देशी लोगों से हिंदी,उर्दू और विदेशियों से अंग्रेजी बोलकर डॉलर झटक लेते है।और तो और एक दिन एक गली के नुक्कड़ पर एक महाशय को एक भिखारिन मिली जिसने कहा कि उसका परिवार दो दिन से भूखा है।महाशय ने तरस खाकर उसे दो किलो आटा, दाल,मसाले इत्यादि दुकान से दिलवा दिए।कुछ देर बाद उन्होंने देखा कि भिखारिन उसी सामान को उसी दुकानदार को वापिस करके नगद रुपये ले रही थी।नगदी लेकर हलवाई की दुकान पर जाकर रबड़ी खाने लगी।आपको अगर एक से एक अदभुत भिखारियों से मिलना है तो देश की राजधानी के नामी बाग़ के एक खास कोने...
कलियुग के बच्चे
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सतयुग ने पूछा कलियुग से कहो,क्या सोचते हो तुम्हारे बच्चे कैसे होंगे?वो इठलाता हुआ बोला मेरे बच्चे,तुम्हारे बच्चों की तरह भोले नहीं बड़े शातिर होंगे।बचपन में दूध नहीं चिप्स और कुरकुरे के लिए रोयेंगे,जवानी में पानी नहीं शराब से मुंह धोएंगे।मेरे बच्चे तुम्हारे बच्चों की तरह गीता और कुरान में नहीं,face book और whats app में विश्वास करेंगे।मेरे बच्चे दादा दादी की कहानी नहीं शीला और मल्लिका का डांस देख सोयेंगे।मेरे बच्चे तुम्हारे बच्चों की तरह सच्चाई के आदर्श में दुःख सहकर किसी की सेवा नहीं करेंगे,बल्कि लोगों का गला काटकर अपनी जेब भरेंगे,जिस थाली में खाएंगे उसी में छेद करेंगे।वो शादी करके घर में नहीं,लिव इन रिलेशन से होटल में रहेंगे और पैसे के लिए तो माँ बाप की हत्या से भी परहेज नहीं करेंगे।और सुनो सतयुग भैया तुम्हारे बच्चे ज्ञान पाने के लिए जी जान लगा देंगे,और मेरे बच्चे चोरी डकैती,रिश्वतखोरी से सबकुछ हासिल कर ऐश करेंगे।क्योंकि मेरे बच्चे तो मेरे हैं-----------साभार-शंकर लाल,वैज्ञानिक अधिकारी इंदौर (मध्यप्रदेश)